आमिर ने उठाए चौखट में सिसकती बेटियों के सवाल
आमिर ने उठाए चौखट में सिसकती बेटियों के सवाल
मुंबई: सवाल उन बेटियों का है जो तरक्की की रफ्तार में गुम होती जा रही हैं. आखिर कहां खोती जा रही हैं हमारी बेटियां? और कैसे हम फिर से उन्हें पा सकते हैं? टीवी पर रविवार से शुरू हुआ आमिर खान का शो ‘सत्यमेव जयते’ उन्हीं सवालों का शो है. क्या आमिर ने जो सवाल उठाया है उससे देश की तस्वीर बदलेगी?
आमिर के इस शो के पहले एपिसोड में कन्या भ्रूण हत्या का मुद्दा उठाया गया. उनके इस शो में तीन ऐसी महिलाओं ने अपना दर्द बताया, जिन्हें घर में बेटी के जन्म देने की कीमत चुकानी पड़ी.
ये देश का सबसे बड़ा रियलिटी शो है. इसके पात्र देशभर में फैले हुए हैं. हमारे-आपके घरों के आसपास भी. लेकिन माफ कीजिएगा, इस शो में मज़ा नहीं है, मंथन है. आनंद नहीं है, आंसू हैं. भावनाओं का भूचाल है, बदलाव की ज़िद से उठा एक बवंडर है और इस बवंडर में तिनके की तरह तिलमिलाता समाज. वो समाज जिसमें हम भी हैं और आप भी.
आमिर के शो में आईं इन महिलाओं ने अपने परिवार और समाज से लड़कर बच्चियों को जन्म दिया और पाला.
‘सत्यमेव जयते’ यानी अकेले सत्य की जीत. इसी जज्बे को लेकर आमिर देश के सामने आए. उन्होंने पहले शो में गर्भ में मारी जा रही बच्चियों की ओर देश का ध्यान खींचा.
समाज के इस सच से देश को एक बार फिर रूबरू कराने के लिए देश की तीन महिलाओँ ने अपना दर्द बयां किया, जिन्होंने बेटी को जन्म देने की भारी कीमत चुकाई.
शो में अहमदाबाद से आई अमीषा याज्ञनिक ने आमिर को बताया कि उनके परिवार वालों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर आठ साल में छह बार जबरदस्ती उनका गर्भपात करवाया क्योंकि उनके पेट में पल रहा गर्भ लड़की का था.
लेकिन फिर भी ससुरालवालों की ज्यादती के आगे अमीषा ने हिम्मत नहीं खोई और अपने मायके में आखिरकार बेटी को जन्म दिया, लेकिन उसके ससुरालवालों ने उसे ठुकरा दिया. अब अमीषा खुद अपने बल पर अपनी बच्ची को पाल-पोस रही है.
शो में मध्य प्रदेश के मुरैना से आई परवीन खान की कहानी तो और भी भयानक है. परवीन के चेहरे को उसके पति ने खराब कर दिया केवल इस वजह से क्योंकि उसने बेटी को जन्म दिया था.
अकसर कहा जाता है कि कन्या भ्रूण हत्या छोटे शहरों और गांवों में ही होती है, लेकिन शो में आईं तीसरी महिला मीतू खुराना ने इस गलतफहमी को भी दूर कर दिया.
पेशे से डॉक्टर मीतू खुराना के ससुसराल वालों ने उन पर जबरदस्ती गर्भपात करने का दबाव डाला क्योंकि उनके पेट में दो जुड़वा बच्चियां पल रही थीं. हालांकि उन्होंने जिद से अपने मायके में बच्चियों को जन्म दिया, लेकिन उनके ससुरालवालों ने उन्हें कबूल नहीं किया. मजे की बात यह है कि मीतू के पति डॉक्टर, ससुर प्रोफेसर और सास रिटायर्ड प्रिसिंपल रह चुकी हैं.
ये दर्द केवल इन्हीं तीन महिलाओं का नहीं है. आमिर ने आंकड़ों की जुबानी भी ये बताया कि आज देश में लड़कियों की तादाद लड़को के मुकाबले कितनी कम हो गई है.
हर साल देश में 10 लाख से ज्यादा बच्चियों को जन्म से पहले ही मार दिया जाता है. उनका कसूर सिर्फ इतना होता है कि वो लड़कियां होती हैं.
आमिर के शो में कुछ हल्के-फुल्के पल भी आए जब उन्होंने ऐसे जवानों से बात की, जिनकी शादी ही नहीं हो रही क्योंकि उस शहर में लड़कियां ही नहीं है.
आमिर समाज के उन सांचों पर सवाल उठाने निकले हैं जिनके चौखटों में बेटियां सिसकती हैं. सब रोए, आमिर रोए, मेहमान रोए, कद्रदान रोए धरती रोई और आसमान रोया.
ये हमारे ही समाज से निकली पटकथाएं हैं. डगमगाते हुए कदम हैं, परेशान करते हुए डायलॉग. पर्दा तो है लेकिन पर्देदारी नहीं है. आवाज़ भी है लेकिन अभिनय नहीं है. कुछ चीखते हुए सवाल हैं.
सीधा अंदाज, साधारण भाषा और सच्ची कहानियों ने सत्यमेव जयते से पहले ही दिन बदलाव की उम्मीद जगा दी है. अब आप बेटियों को देखते हुए अपनी नज़र को बदला हुआ महसूस करेंगे. आपके भीतर आधी आबादी के अधिकार को लेकर एक तड़प सी उठेगी.
आमिर के शो की थीम है- ‘दिल पे लगेगी तभी बात बनेगी’. उनकी ये बातें देश के दिल पर लग रही थीं. वो सवाल उठा रहे थे, जवाब तलाश रहे थे.
आमिर लोगों से अपील कर रहे थे क्योंकि इस समस्या को जड़ से मिटाने की बारी अब आमिर की नहीं आपकी है. उनका ये शो सही मायने में तभी सफल हो पाएगा जब समाज बच्चियों को गर्भ में मारने की तरफ आगे नहीं बढ़ेगा.
आमिर भी ऐसी ही जीत की कामना कर रहे हैं, क्योंकि यही सच की जीत है. केवल सत्य की जीत. सत्यमेव जयते.
Hi Team,
We worked on a 2 min. short film on female foetecide issue which sends across the message for this terrible menace in our society in a lighter way. Hope you would like it.
We were really touched by efforts and endevaour on this sensitive topic.
Thanks,
Deepak
deepaktrivadi@gmail.com
91-8826160696